दौसा का ‘मीणा हाईकोर्ट’: 33 साल पुराना फैसला जिसने रचा इतिहास

दौसा, 09 अगस्त। राजस्थान के दौसा जिले के नांगल राजावतान क्षेत्र स्थित मीणा हाईकोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बीच इस जगह का 33 साल पुराना इतिहास भी सामने आया है। ‘मीणा हाईकोर्ट’ नाम भले ही किसी संवैधानिक या न्यायिक संस्था का आभास देता हो, लेकिन वास्तव में इसका किसी सरकारी या कानूनी अदालत से कोई संबंध नहीं है। यह मीणा समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, सामुदायिक बैठकों और पंच-पटेलों के विचार-विमर्श का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

1993 की घटना से जुड़ी है कहानी

मीणा हाईकोर्ट के इतिहास की सबसे चर्चित कड़ी 1993 की एक हत्या की घटना से जुड़ी है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला द्वारा अपने पति की हत्या किए जाने और उसके प्रेमी के कथित रूप से इसमें शामिल होने का मामला सामने आया था।

इसके बाद 84 गांवों के पंच-पटेलों की बैठक हुई और आरोपियों के खिलाफ पारंपरिक सामाजिक कार्रवाई की गई। बताया जाता है कि इस कार्रवाई में प्रेमी और प्रेमिका का मुंह काला किया गया तथा प्रेमी को गधे पर बैठाकर और महिला को गधे की रस्सी पकड़ाकर गांव में घुमाया गया।

पंच-पटेलों की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच पंच-पटेलों को गिरफ्तार कर लिया। जब अदालत से उनकी जमानत खारिज हुई तो समाज में नाराजगी बढ़ गई। उनकी रिहाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग लामबंद हुए और मामला सामाजिक आंदोलन का रूप लेने लगा। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 हजार लोगों के जुटने की बात सामने आई थी।

बढ़ते तनाव के बीच तत्कालीन महुवा विधायक किरोड़ी लाल मीणा को भी मामले में हस्तक्षेप के लिए बुलाया गया। उन्होंने समाज और प्रशासन के बीच समाधान की कोशिश की। इसके बाद गिरफ्तार पंच-पटेलों की रिहाई हुई। इसी घटनाक्रम के बाद प्यारीवास के इस स्थान को प्रतीकात्मक रूप से ‘मीणा हाईकोर्ट’ नाम दिए जाने की बात सामने आती है।

आज भी सामाजिक बैठकों का प्रमुख केंद्र

समय के साथ ‘मीणा हाईकोर्ट’ नाम मीणा समाज में व्यापक रूप से प्रचलित हो गया। यहां पंच-पटेलों की बैठकें होती हैं और समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक एवं सामुदायिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मीणा हाईकोर्ट कोई संवैधानिक, सरकारी या न्यायिक अदालत नहीं है। यहां न्यायाधीश नहीं बैठते और अदालत की तरह कानूनी फैसले नहीं सुनाए जाते। ‘हाईकोर्ट’ नाम इसकी सामाजिक और प्रतीकात्मक पहचान का हिस्सा है।

अब शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में

समय के साथ इस सामाजिक केंद्र की भूमिका भी बदल रही है। पारंपरिक सामाजिक बैठकों के साथ अब शिक्षा, युवाओं, रोजगार और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।

विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में 33 साल पुरानी घटना का जिक्र करते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने भी इस घटनाक्रम को याद किया। इस तरह दौसा का मीणा हाईकोर्ट आज भी मीणा समाज की सामाजिक एकजुटता, परंपरा और सामुदायिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

Written By

DESK HP NEWS

Hp News

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
राजस्थान संपर्क पोर्टल का मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण, किसानों की शिकायतों के जल्द निस्तारण के निर्देश | Kolkata Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 17 लोगों की मौत, 25 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान | ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के बाहर भीषण हादसा: ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला, 15 की मौत और 26 घायल | कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़: 19 लोगों की मौत, आयोजकों समेत 7 गिरफ्तार; मृतकों में छात्रा और नर्स भी शामिल | खेलो राजस्थान: दिसंबर से शुरू होगा पहला चरण, 12 खेलों में दिखेगा खिलाड़ियों का दम; ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू | नवरात्रि का आठवां दिन आज: मां महागौरी की पूजा से जुड़ी मान्यताएं, जानें मंत्र, भोग और पूजा विधि | कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रैवलर नाले में गिरा; 8 लोगों की मौत, 17 घायल | राजस्थान में मौसम का बदला मिजाज, 7 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी | जोधपुर: लोहावट में बोरवेल में गिरा मासूम, SDRF के बाद NDRF की टीम भी रेस्क्यू में जुटी | जयपुर में रोजगार शिविर: 366 युवाओं को मिला रोजगार, 28 का प्रशिक्षण के लिए चयन |