टेक्सटाइल क्लस्टरों में प्रदूषण पर सरकार सख्त, मुख्य सचिव ने दिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अक्षरशः पालन के निर्देश

जयपुर, 21 अगस्त। राजस्थान में संचालित विभिन्न टेक्सटाइल उद्योग क्लस्टरों में पर्यावरण मानकों की पालना और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में समीक्षा बैठक की। बैठक में बालोतरा, जसोल, पाली, सांगानेर और जोधपुर के टेक्सटाइल क्लस्टरों में प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट जल प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त और समयबद्ध कार्रवाई की जाए तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित हो।

35 दिनों में 2 हजार से अधिक टेक्सटाइल इकाइयां सील

बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जोजरी, बांडी, लूनी और सांगानेर बेसिन में कड़े पर्यावरणीय नियम लागू किए गए हैं। इन प्रावधानों के तहत दीवानी जुर्माने के स्थान पर क्रिमिनल लाइबिलिटी का प्रावधान किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले 35 दिनों में 2,000 से अधिक टेक्सटाइल MSME इकाइयों को सील किया गया है।

नदियों के पुनरुद्धार के लिए बनेगा ब्लूप्रिंट

बैठक में नदियों में प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट जल प्रबंधन और पर्यावरण सुधार के लिए रिवर बेल्ट के रेस्टोरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार करने पर चर्चा हुई।

इसके तहत रिवर बेसिन अथॉरिटी द्वारा रेगुलेटरी जोन बनाए जाएंगे। ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने, नदियों से स्लज यानी गाद हटाने तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

बैठक में AI आधारित वॉटर ट्रीटमेंट टूल्स के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

केंद्र सरकार देगा वित्तीय सहयोग

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुईं केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया।

उन्होंने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं में लंबित भुगतान जल्द किए जाने तथा आवश्यकतानुसार हर संभव वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही।

विभिन्न CETP की स्थिति की समीक्षा

बैठक में IPDS के अंतर्गत प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टरों और CETP की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी गई।

बालोतरा

बालोतरा में 18 MLD क्षमता का ZLD संयंत्र स्थापित किया गया है। परियोजना की लागत 131.90 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 65.95 करोड़ रुपये है। वर्तमान में यह संयंत्र RSPCB द्वारा पिछले कुछ महीनों से बंद है।

जसोल

जसोल में 2.5 MLD क्षमता का ZLD संयंत्र है। इसकी परियोजना लागत 38.50 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 19.25 करोड़ रुपये है। वर्तमान में RSPCB द्वारा इसे केवल 1.1 MLD क्षमता पर संचालित करने की अनुमति दी गई है।

पाली

पाली के यूनिट-VI में 12 MLD क्षमता वाले ZLD संयंत्र की परियोजना लागत 100 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 50 करोड़ रुपये है। वर्तमान में यह संयंत्र 3 MLD क्षमता पर संचालित हो रहा है।

इसके अलावा नेक्स्टजेन टेक्सटाइल पार्क, पाली में 4 MLD स्थापित क्षमता में से 3 MLD पर संयंत्र संचालित है। इसकी परियोजना लागत 129.42 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 64.71 करोड़ रुपये है।

सांगानेर

जयपुर के सांगानेर में 12.3 MLD क्षमता वाले CETP की परियोजना लागत 159 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का अंशदान 75 करोड़ रुपये है। वर्तमान में यह संयंत्र केवल 1.5 MLD क्षमता पर आंशिक रूप से संचालित है।

जोधपुर

जोधपुर में 306 टेक्सटाइल इकाइयों का औसत अपशिष्ट आवक वर्तमान में उद्योगों के बंद होने के कारण शून्य है। यहां ZLD अपग्रेडेशन की समय-सीमा 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है।

CETP को ZLD तकनीक में अपग्रेड करने पर जोर

बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से सभी CETP को जल्द से जल्द Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक में अपग्रेड करने पर मंथन किया गया।

इसके साथ ही RIICO द्वारा स्वयं CETP स्थापित एवं संचालित करने के लिए आवश्यक नीतिगत दिशा-निर्देश तैयार करने पर भी चर्चा हुई।

गैर-अनुपालन के मामलों में RIICO को CETP स्थापित करने की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।

CETP अपग्रेडेशन के लिए वित्तीय सहायता

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से CETP संयंत्रों को ZLD तकनीक में अपग्रेड करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

CETP स्थापना/अपग्रेडेशन सहायता योजना के तहत प्रति MLD 18 करोड़ रुपये तक, अधिकतम 100 करोड़ रुपये की सीमा के साथ, परियोजना लागत का 75 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है।

वहीं RIICO औद्योगिक क्षेत्रों में HAM मॉडल योजना के तहत प्रति MLD 18 करोड़ रुपये तक, अधिकतम 150 करोड़ रुपये की सीमा में 80 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। शेष 20 प्रतिशत अंशदान SPV द्वारा किया जाएगा।

गैर-RIICO क्षेत्रों में भी HAM मॉडल योजना के तहत प्रति MLD 18 करोड़ रुपये तक, अधिकतम 150 करोड़ रुपये की सीमा में 80 प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

डिफॉल्टरों पर सख्त कार्रवाई और सतत निगरानी

बैठक में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त और समयबद्ध कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही लगातार निगरानी के लिए प्रभावी प्रणाली लागू करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पर्यावरण संरक्षण और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पूरी तरह पालना सुनिश्चित करें।

बैठक में खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा, उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं RIICO के अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर आत्माराम सावंत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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