मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा पर्व पर मेहंदी अर्पित करने और उसे प्रसाद के रूप में वितरित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस परंपरा को करीब 200 साल पुराना बताया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि भगवान गणेश को अर्पित की गई मेहंदी को हाथों पर लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और जल्द विवाह का योग बनता है।
इस मेहंदी को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह अविवाहित युवक-युवतियों में देखने को मिलता है। बड़ी संख्या में युवा भगवान गणेश के दरबार में पहुंचकर मेहंदी प्रसाद प्राप्त करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गणेश जी की कृपा से शादी में आ रही अड़चनें दूर हो सकती हैं।
कई श्रद्धालु इस परंपरा को 'चट मंगनी, पट ब्याह' की मान्यता से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि विवाह से जुड़ी ये मान्यताएं धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर की यह परंपरा अब सोशल मीडिया के जरिए जयपुर से बाहर भी लोकप्रिय हो रही है। मेहंदी प्रसाद, मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ और इससे जुड़ी मान्यताओं के वीडियो और रील्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल होते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता के कारण बड़ी संख्या में युवा इस आयोजन के बारे में जान रहे हैं और मेहंदी प्रसाद लेने मंदिर पहुंच रहे हैं। इससे हर साल इस आयोजन को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ती नजर आ रही है।
समय के साथ इस परंपरा का दायरा कितना बढ़ा है, इसका अंदाजा मेहंदी की मात्रा से लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि पहले भगवान गणेश को करीब सवा किलो मेहंदी अर्पित की जाती थी।
वहीं, अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए करीब 35 क्विंटल यानी 3,500 किलो मेहंदी की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए मेहंदी पाली की प्रसिद्ध सोजत मंडी से मंगाई जाती है।
मेहंदी प्रसाद पाने को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह रहता है। कई श्रद्धालु वितरण शुरू होने से काफी पहले ही मंदिर पहुंच जाते हैं। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं और लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
भारी भीड़ के चलते मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी काफी चहल-पहल रहती है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण भीड़ को नियंत्रित करना और व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मोती डूंगरी की मेहंदी परंपरा से एक और खास मान्यता जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जिन लोगों की शादी की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे अगले साल मंदिर में भगवान गणेश के चरणों में अपनी शादी का पहला निमंत्रण पत्र अर्पित करते हैं।
यही वजह है कि कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर गणेश जी के दरबार में आते हैं और विवाह के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर आभार व्यक्त करते हैं।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में इन दिनों नौ दिवसीय गणेश जन्मोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उत्सव के दौरान मंदिर में अलग-अलग दिनों पर विशेष झांकियां, धार्मिक कार्यक्रम और भोग के आयोजन किए जा रहे हैं।
मोदक, फूल, फल और सब्जियों से सजाई जाने वाली विशेष झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। सिंजारा पर्व के बाद गणेश चतुर्थी के मुख्य पर्व को लेकर भी मंदिर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर की मेहंदी परंपरा धार्मिक आस्था और बदलते सोशल मीडिया दौर का अनोखा उदाहरण बन गई है। करीब दो शताब्दी पुरानी इस परंपरा को सोशल मीडिया की रील्स और वीडियो ने नई पहचान दी है।
मेहंदी प्रसाद पाने के लिए उमड़ती भीड़ बताती है कि भगवान गणेश के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कितनी गहरी है। वहीं, सोशल मीडिया के जरिए इस परंपरा की जानकारी दूर-दराज के लोगों तक पहुंचने से आने वाले वर्षों में भी इसके प्रति आकर्षण बने रहने की संभावना है।
नोट: विवाह संबंधी मेहंदी की मान्यताएं धार्मिक और लोक आस्था पर आधारित हैं। इनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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