आतंकियों पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, 38 दोषियों की फांसी बरकरार

26 जुलाई 2008 की शाम अहमदाबाद में महज 45 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। आतंकियों ने मणिनगर, नरोदा, बापूनगर, इसानपुर, सरखेज और हटकेश्वर समेत भीड़भाड़ वाले इलाकों, बसों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाया था।

हमले की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल और एल.जी. अस्पताल के बाहर भी धमाके किए गए, जहां पहले विस्फोट में घायल लोगों का इलाज चल रहा था। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

लंबी जांच और सुनवाई के बाद 18 फरवरी 2022 को स्पेशल कोर्ट ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोषियों ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की थी।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मौत की सजा और उम्रकैद की सजा की पुष्टि कर दी है।

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