15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानिए अखंड ज्योति जलाने का महत्व, शुभ तिथि और जरूरी नियम

नई दिल्ली। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व तंत्र-मंत्र साधना, शक्ति उपासना और मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की आराधना के लिए माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर विधि-विधान से देवी की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

गुप्त नवरात्रि में कई श्रद्धालु मां दुर्गा के समक्ष अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पूरे नवरात्रि काल में अखंड दीपक जलाने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

अखंड ज्योति का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अखंड ज्योति देवी शक्ति की निरंतर उपस्थिति, ज्ञान और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान लगातार जलने वाला दीपक घर के वातावरण को पवित्र बनाए रखता है और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक अखंड दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों पर माता दुर्गा की कृपा बनी रहती है।

कब से कब तक रहेगी गुप्त नवरात्रि?

वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से शुरू होकर 22 जुलाई (बुधवार) तक रहेगी। इस बार तिथि के विशेष संयोग के कारण 17 जुलाई (शुक्रवार) को तीसरे और चौथे दिन की पूजा एक साथ की जाएगी।

गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्याओं की आराधना

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है। इनमें शामिल हैं—

  • मां काली

  • मां तारा

  • मां त्रिपुर सुंदरी

  • मां भुवनेश्वरी

  • मां छिन्नमस्ता

  • मां त्रिपुर भैरवी

  • मां धूमावती

  • मां बगलामुखी

  • मां मातंगी

  • मां कमला

अखंड ज्योति जलाने के प्रमुख नियम

  • पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।

  • दीपक को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है।

  • दीपक में शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

  • रुई की साफ और पर्याप्त लंबी बाती रखें, ताकि दीपक लगातार जलता रहे।

  • नौ दिनों तक दीपक बुझने न दें और समय-समय पर घी या तेल डालते रहें।

  • दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह रखें, जहां तेज हवा या दुर्घटना की संभावना न हो।

  • यदि किसी कारण दीपक बुझ जाए तो स्नान कर माता से क्षमा प्रार्थना करें और विधि-विधान से पुनः दीप प्रज्ज्वलित करें।

इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान

नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र या मां दुर्गा के मंत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है। साथ ही सात्विक भोजन, संयमित आचरण, स्वच्छता और सत्य का पालन करने की सलाह दी जाती है।

नोट: धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं। श्रद्धालु अपने-अपने विश्वास और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानिए अखंड ज्योति जलाने का महत्व, शुभ तिथि और जरूरी नियम

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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