राजधानी जयपुर में मिलावटखोर बेखौफ होकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे थे, लेकिन शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत खाद्य विभाग की सख्त कार्रवाई ने बड़ा खुलासा किया। करीब 10 हजार लीटर नकली घी सीज होने से हड़कंप मच गया।
राजधानी जयपुर में खाने-पीने की चीजों में मिलावट का खेल लंबे समय से चल रहा था। आम लोग रोज़ाना जो सामान बाजार से खरीदते हैं, वही धीरे-धीरे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। घी, तेल और मसालों जैसी जरूरी चीजों में मिलावट अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसी बीच खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुद्ध आहार-मिलावट पर वार अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई कर मिलावटखोरों को साफ संदेश दिया है। बुधवार देर शाम जयपुर में की गई इस कार्रवाई में करीब 10 हजार लीटर वनस्पति घी को सीज किया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
शुद्ध आहार-मिलावट पर वार अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जयपुर प्रथम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रवि शेखावत के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा टीम ने कुकरखेड़ा मंडी में छापा मारा। यहां मैसर्स रुक्मणी इंटरप्राइजेज नाम की फर्म पर मिलावट के संदेह के आधार पर जांच की गई। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में वनस्पति घी पाया गया, जिसकी गुणवत्ता पर सवाल उठे। मौके पर ही करीब 9853 लीटर अशोका ब्रांड का वनस्पति घी सीज कर दिया गया।
अशोका ब्रांड का घी फिर शक के घेरे में
खास बात यह है कि अशोका ब्रांड का वनस्पति घी पहले भी जांच में फेल हो चुका है। खाद्य विभाग के अनुसार, इसी फर्म से सितंबर 2025 में लिया गया नमूना सबस्टैंडर्ड पाया गया था। इसके बावजूद दोबारा उसी ब्रांड का घी बाजार में सप्लाई किया जा रहा था। मौके पर अशोका वनस्पति घी के दो अलग-अलग बैच के सैंपल लिए गए। साथ ही नेचर फ्रेश वनस्पति घी का भी एक सैंपल जांच के लिए लिया गया। अब इन सभी नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां इनकी गुणवत्ता और मिलावट की पुष्टि की जाएगी।
मिर्च पाउडर से लेकर सरसों तेल तक जांच के दायरे में
खाद्य विभाग की कार्रवाई केवल घी तक सीमित नहीं रही। वीकेआई क्षेत्र में भी कई दुकानों पर छापेमारी की गई। मैसर्स सैनी किराना स्टोर से मिर्च पाउडर का सैंपल लिया गया और करीब 150 किलो मिर्च पाउडर सीज किया गया। मैसर्स अग्रवाल इंटरप्राइजेज से महान ब्रांड के घी का नमूना लिया गया। मुकेश डिपार्टमेंटल स्टोर से धनिया पाउडर का सैंपल लिया गया। चौमू किराना स्टोर से सरसों के तेल का नमूना जांच के लिए भेजा गया। इन सभी नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संभाली कमान
इस पूरी कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार शर्मा, वीरेंद्र सिंह, विशाल मित्तल और पवन गुप्ता शामिल रहे। अधिकारियों ने साफ किया कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी मिलावटखोर को बख्शा नहीं जाएगा। खाद्य विभाग का कहना है कि जयपुर जैसे बड़े शहर में रोज़ लाखों लोग बाजार से खाने-पीने का सामान खरीदते हैं। ऐसे में अगर मिलावट की चीजें बाजार में पहुंचती हैं, तो इसका असर सीधे आम जनता की सेहत पर पड़ता है।
आम लोगों की सेहत पर कितना खतरनाक है नकली घी और मिलावटी मसाले
वनस्पति घी और मिलावटी मसाले दिखने में भले ही असली जैसे लगें, लेकिन ये शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। नकली घी में अक्सर सस्ते केमिकल, हाइड्रोजनेटेड ऑयल और रंग मिलाए जाते हैं, जो दिल, लीवर और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तरह मिर्च और धनिया पाउडर में रंग, ईंट का चूरा या अन्य हानिकारक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर और भी ज्यादा होता है।
जयपुर में मिलावटखोरी क्यों बन रही है बड़ी समस्या
जयपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और बड़ी मंडियों के कारण मिलावटखोर सक्रिय हैं। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में घी, तेल और मसालों की मांग बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग सस्ता माल बनाकर महंगे दामों में बेचते हैं। हालांकि, खाद्य विभाग की लगातार कार्रवाई से अब इन पर दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी सख्त जांच अभियान चलाए जाएंगे।
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