मानसून की देरी से जम्मू-कश्मीर में केसर और सेब की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली/श्रीनगर:
जम्मू-कश्मीर में मानसून की देरी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है। लंबे समय से बारिश नहीं होने और लगातार बढ़ती गर्मी व उमस ने प्रदेश की दो प्रमुख नकदी फसलों—केसर (सैफ्रन) और सेब—पर संकट खड़ा कर दिया है। केसर उत्पादकों और सेब बागवानों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो इस साल उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

पंपोर, जिसे भारत की केसर नगरी कहा जाता है, के किसान सूखे मौसम को लेकर खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि केसर की फसल के विकास के लिए समय पर नमी और अनुकूल मौसम बेहद जरूरी होता है। लगातार शुष्क मौसम के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है, जिससे पौधों की वृद्धि और फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, कश्मीर घाटी के सेब उत्पादकों का भी कहना है कि अत्यधिक गर्मी और बारिश की कमी से बागानों में फलों का आकार, गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। कई इलाकों में पेड़ों पर पानी की कमी का असर दिखाई देने लगा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अक्टूबर-नवंबर तक मौसम सामान्य नहीं हुआ और पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो केसर उत्पादन को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, सेब की फसल की गुणवत्ता और पैदावार भी प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

हालांकि, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। लेकिन इसके साथ ही भारी वर्षा, फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) और जलभराव की चेतावनी भी जारी की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे सूखे के बाद यदि बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है, तो इससे फसलों और बागानों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

किसानों ने सरकार से सिंचाई की बेहतर व्यवस्था, समय पर तकनीकी सहायता और आवश्यक राहत उपाय उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

 

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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