जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य पशु ऊंट की लगातार घटती आबादी और राज्य में हाथियों की दयनीय स्थिति को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस मुद्दे को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजस्थान की पहचान माने जाने वाले ऊंटों की संख्या लगातार कम होना चिंता का विषय है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि राज्य पशु घोषित किए जाने के बावजूद ऊंट संरक्षण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और इनके सकारात्मक परिणाम क्या रहे हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य में हाथियों की खराब स्थिति पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि हाथियों के संरक्षण, देखभाल और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। कोर्ट ने सरकार से हाथियों की वर्तमान स्थिति, उनके संरक्षण के लिए बनाई गई योजनाओं और अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि ऊंट संरक्षण के लिए संचालित योजनाओं, बजट, जनसंख्या के आंकड़ों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि राज्य में ऊंटों की घटती संख्या को रोकने के लिए क्या विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि कभी राजस्थान की शान माने जाने वाले ऊंटों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से घटी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक परिवहन साधनों के बढ़ते उपयोग, चरागाहों की कमी और ऊंट पालन के प्रति घटती रुचि इसके प्रमुख कारण हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब राज्य सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी, जिससे राज्य पशु ऊंट और हाथियों के संरक्षण को लेकर नई रणनीति बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.